आरक्षण हटाने से पहले समाज की सच्चाई देखिए’: आदित्य पासवान

प्रदेश कांग्रेस सेवादल के नेता आदित्य पासवान ने आरक्षण को सामाजिक न्याय का संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि इसे समाप्त करने की मांग करने से पहले समाज की वास्तविक स्थिति और जातिगत भेदभाव को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक असमानता बनी रहेगी, तब तक आरक्षण की आवश्यकता भी बनी रहेगी।
आरक्षण हटाने से पहले समाज की सच्चाई देखिए’: आदित्य पासवान
आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर प्रेस बयान जारी करते कांग्रेस सेवादल नेता आदित्य पासवान।

प्रदेश कांग्रेस सेवादल के नेता आदित्य पासवान ने आरक्षण को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण किसी वर्ग पर किया गया उपकार नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से वंचित तबकों को बराबरी का अवसर देने के लिए संविधान में किया गया प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर राय बनाने से पहले समाज की वास्तविक स्थिति को समझना आवश्यक है।

आदित्य पासवान ने जारी बयान में कहा कि आज भी देश के अनेक हिस्सों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई लोगों को आज भी उनकी योग्यता से पहले उनकी जाति के आधार पर परखा जाता है। ऐसे में यह कहना कि आरक्षण की अब जरूरत नहीं रही, जमीनी हकीकत से आंखें मूंदने जैसा है।

उन्होंने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और उन्होंने करीब से देखा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद कितने बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं। कई परिवारों के पास अच्छी शिक्षा, किताबें और पढ़ाई का अनुकूल माहौल तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरक्षण उन युवाओं के लिए आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता है।

कांग्रेस सेवादल नेता ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य किसी को विशेष सुविधा देना नहीं, बल्कि उन वर्गों को बराबरी का अवसर उपलब्ध कराना है, जो वर्षों तक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पीछे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में जातिगत भेदभाव, अवसरों की असमानता और सामाजिक विषमता बनी रहेगी, तब तक आरक्षण की आवश्यकता भी बनी रहेगी।

आदित्य पासवान ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी विषय पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके सामाजिक और ऐतिहासिक पक्ष को समझना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आरक्षण को केवल नौकरी या सीट के नजरिए से न देखें, बल्कि इसे सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने वाले संवैधानिक प्रावधान के रूप में समझें।