केसरिया स्तूप को ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी, अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने किया निरीक्षण
पूर्वी चम्पारण जिले के ऐतिहासिक एवं विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप के संरक्षण और समग्र विकास को लेकर बुधवार, 29 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर (भा.प्र.से.) ने की।
बैठक में क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर, जिला पदाधिकारी पूर्वी चम्पारण, वन प्रमंडल पदाधिकारी मोतिहारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के बाद अधिकारियों ने केसरिया स्तूप के निकट चल रहे निर्माण कार्यों और प्रस्तावित विकास स्थलों का स्थल निरीक्षण भी किया।
बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने केसरिया स्तूप के आसपास उपलब्ध भूमि पर समग्र विकास कार्यों की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। साथ ही, पूरे पर्यटन सर्किट को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए निकट स्थित सरोत्तर झील के विकास का भी प्रस्ताव रखा गया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि स्तूप की चारदीवारी से 100 मीटर की परिधि तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं, 100 से 200 मीटर की दूरी के बीच 7 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले निर्माण कार्य की अनुमति नहीं है।
अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने निर्देश दिया कि विकास कार्य पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि ऊँची इमारतों के बजाय ईको-फ्रेंडली हट्स, हरित क्षेत्र (ग्रीन एरिया) और आकर्षक लैंडस्केपिंग को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की मूल पहचान सुरक्षित रहे और पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव मिल सके।
बैठक में क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर ने जैन पार्क के निर्माण का सुझाव दिया, जबकि अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया ने क्षेत्र में संचालित विपासना केंद्र की गतिविधियों को पर्यटन विकास योजना में शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
सरोत्तर झील के विकास पर चर्चा करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मोतिहारी ने बताया कि झील को आर्द्रभूमि (Wetland) के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और भविष्य में पहुंच पथ का अधिग्रहण कर व्यापक पर्यटन विकास कार्य किए जा सकते हैं।
बैठक के अंत में अपर मुख्य सचिव ने विभागीय ईको-टूरिज्म निर्माण सलाहकार को निर्देश दिया कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों और प्रस्तावों को समेकित कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर विभाग को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।
