नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी मामले में फरार अभियुक्त के घर इश्तहार तालीम किय

चकिया। नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा मामले में फरार चल रहे अभियुक्त के विरुद्ध शिकारगंज थाना पुलिस ने न्यायालय से प्राप्त इश्तहार की विधिवत तामील कराई। मामला थाना कांड संख्या 36/26 से संबंधित है।
नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी मामले में फरार अभियुक्त के घर इश्तहार तालीम किय
नौकरी धोखाधड़ी मामले में फरार अभियुक्त के घर शिकारगंज पुलिस ने कराया इश्तहार तामील।

चकिया। शिकारगंज थाना पुलिस ने नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा से जुड़े मामले में फरार चल रहे एक अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय से प्राप्त इश्तहार की विधिवत तामील कराई है। पुलिस की यह कार्रवाई थाना कांड संख्या 36/26 से जुड़े मामले में की गई।

पुलिस के अनुसार, मामले में बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 352 और 351(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज है। इस मामले में शुभम सिंह उर्फ राजन सिंह, पिता मुकेश सिंह, निवासी कपूर पकड़ी, थाना शिकारगंज, जिला पूर्वी चंपारण को अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक अभियुक्त मामले में फरार चल रहा है।

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बताया गया कि फरार अभियुक्त के विरुद्ध पुलिस द्वारा न्यायालय से विधिवत इश्तहार प्राप्त किया गया। इसके बाद शिकारगंज थानाध्यक्ष गोपाल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने संबंधित पते पर पहुंचकर न्यायालय से प्राप्त इश्तहार की तामील कराई।

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान लोगों को न्यायालय के आदेश और मामले की जानकारी से अवगत कराया गया। इश्तहार की तामील का उद्देश्य फरार अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत सूचना देना है।

पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस स्तर से आवश्यक कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।

क्या है मामला?

यह मामला नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से संबंधित बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में नामजद अभियुक्त के फरार रहने के बाद न्यायालय से इश्तहार प्राप्त कर उसकी विधिवत तामील कराई गई।

फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देश और पुलिस जांच के आधार पर होगी। किसी भी अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तब तक अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जाता, जब तक न्यायालय द्वारा मामले में निर्णय नहीं दिया जाता।