कई महीनों से 171 बच्चों को अंडा और मौसमी फल से वंचित रखने का आरोप, विद्यालय की बदहाल व्यवस्था उजागर | AGM FIRST ग्राउंड रिपोर्ट
कई महीनों से 171 बच्चों को अंडा और मौसमी फल से वंचित रखने का आरोप, विद्यालय की बदहाल व्यवस्था उजागर | AGM FIRST ग्राउंड रिपोर्ट
आदापुर (पूर्वी चंपारण)। बिहार सरकार बच्चों के बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। मध्याह्न भोजन योजना के तहत सप्ताह के निर्धारित दिनों में अंडा अथवा मौसमी फल देने का प्रावधान है। लेकिन आदापुर प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, गम्हरिया कला (पश्चिम टोला) में AGM FIRST की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
AGM FIRST की टीम ने विद्यालय पहुंचकर पूरे परिसर का निरीक्षण किया। विद्यालय की स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड किया गया तथा प्रधान शिक्षक, रसोइयों, छात्रों, अभिभावकों और ग्रामीणों के बयान कैमरे पर दर्ज किए गए।
बच्चे के अभिभावक रामभरोश प्रसाद चौरसिया ने AGM FIRST से बातचीत में आरोप लगाया कि विद्यालय में पढ़ाई नियमित रूप से नहीं होती। कभी सुबह 10 बजे तो कभी 11 बजे प्रार्थना कराई जाती है और शिक्षक मनमाने ढंग से विद्यालय का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इसकी शिकायत लेकर विद्यालय पहुंचे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बच्चा विद्यालय में पढ़ने जाता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है तथा कई महीनों से बच्चों को अंडा एवं मौसमी फल नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम लोग दूसरे राज्यों में 10-12 घंटे मजदूरी कर पसीना बहाते हैं। सरकार गरीबों के बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन विद्यालय में उसका लाभ नहीं मिल रहा। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनें, लेकिन अगर सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई ही नहीं होगी तो गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा?”
ग्रामीण अनुराग भगत ने बताया कि उनका घर विद्यालय के ठीक सामने है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी बच्चों को विद्यालय में अंडा या फल खाते नहीं देखा।
प्रमिला देवी (पति- आत्मा बैठा), जिनके तीन बच्चे इसी विद्यालय में पढ़ते हैं, ने बताया कि बच्चों को लंबे समय से अंडा और फल नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय का शौचालय अधिकतर समय गंदा रहता है और कई बार उसमें ताला लगा रहता है। उनका यह भी आरोप है कि शिक्षक भी शौचालय का उपयोग नहीं करते और विद्यालय परिसर के बाहर पेशाब करते हैं, जिससे आसपास रहने वाली महिलाओं को परेशानी होती है।

प्रियंका कुमारी ने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई का कोई निश्चित समय नहीं है। बच्चे इधर-उधर घूमते रहते हैं और नियमित रूप से कक्षाएं नहीं चलतीं।
रोहित कुमार ने कहा कि शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में सांप या अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के काटने का खतरा बना रहता है।
अनीता देवी (पति- हरीकिशोर प्रसाद) ने बताया कि अभिभावक-शिक्षक बैठक में उन्हें नियमित रूप से नहीं बुलाया जाता। उन्होंने कहा कि बच्चों को पिछली बार अंडा ठंड के मौसम में मिला था, उसके बाद नहीं मिला।
विद्यालय की रसोइया मुनि देवी और मीना देवी ने बताया कि करीब चार-पांच महीने से बच्चों को अंडा नहीं मिला है।

वर्ग पांच की छात्रा दुर्गा कुमारी ने बताया कि जब वह दूसरी कक्षा में पढ़ती थीं, तब अंडा और फल मिला था, लेकिन अब पांचवीं कक्षा में आने के बाद नहीं मिला। उन्होंने बताया कि निरीक्षण वाले दिन लंच से पहले केवल दो शिक्षक अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाने आए थे, जबकि एक दिन पहले चार विषयों की पढ़ाई हुई थी।
वर्ग दो के छात्र विजय कुमार ने बताया कि निरीक्षण वाले दिन केवल महेश सर ने पढ़ाया।
वर्ग चार की छात्रा दीक्षा कुमारी ने बताया कि धीरेंद्र सर ने गणित पढ़ाया। उसने बताया कि फल तीन-चार महीने पहले और अंडा करीब पांच महीने पहले मिला था। पिछले शुक्रवार को भी बच्चों को न अंडा मिला और न ही मौसमी फल दिया गया।
विद्यालय में कुल 171 बच्चों का नामांकन है। प्रधान शिक्षक ओमप्रकाश गुप्ता ने 120 बच्चों की उपस्थिति बताई, लेकिन मध्याह्न भोजन के बाद विद्यालय परिसर में करीब 50 के आसपास ही बच्चे दिखाई दिए।
शुक्रवार के मेन्यू में बच्चों को केवल चावल और आलू-चना की सब्जी परोसी जा रही थी, जबकि सरकारी मेन्यू के अनुसार शुक्रवार को अंडा अथवा मौसमी फल दिया जाना है।
प्रधान शिक्षक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि विद्यालय में भवन, पर्याप्त भूमि, समरसेबल बोरिंग, बाउंड्री वॉल और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि शौचालय की सफाई प्रतिदिन कराई जाती है तथा सरकारी मेन्यू के अनुसार बच्चों को अंडा अथवा मौसमी फल उपलब्ध कराया जाता है।
हालांकि AGM FIRST की टीम को निरीक्षण के दौरान शौचालय गंदे मिले। एक शौचालय पर ताला लगा था, जबकि दूसरा मल से जाम पाया गया। विद्यालय में सफाईकर्मी की तैनाती के बावजूद साफ-सफाई पर सवाल उठे।
इसी बीच निरीक्षण की सूचना मिलने के बाद प्रधान शिक्षक आदापुर की ओर से एक कैरेट केला लेकर विद्यालय पहुंचे। इस पर मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि प्रत्येक शुक्रवार बच्चों को फल दिया जाता है तो निरीक्षण के समय पहले से इसकी व्यवस्था क्यों नहीं थी।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई, विद्यालय की व्यवस्था में सुधार तथा बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार अंडा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराने की मांग की है।
रिपोर्ट: रविन्द्र जाडेजा
Editor-in-Chief, AGM FIRST
