626 बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे! 6 शिक्षक, फिर भी पढ़ाई ठप, पंखे बंद, बदहाल शौचालय और विद्यालय परिसर में शराब की बोतलें

पूर्वी चंपारण के आदापुर स्थित राजकीय मध्य विद्यालय मझरिया में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली सामने आई है। 626 नामांकित छात्रों वाले इस विद्यालय में शिक्षक होने के बावजूद नियमित पढ़ाई नहीं हो रही। बच्चे गर्मी में बिना पंखे के पढ़ने को मजबूर हैं, शौचालय बदहाल है, स्मार्ट क्लास बंद है और विद्यालय परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
626 बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे! 6 शिक्षक, फिर भी पढ़ाई ठप, पंखे बंद, बदहाल शौचालय और विद्यालय परिसर में शराब की बोतलें
सरकारी स्कूल की सच्चाई: 626 बच्चों के बीच बदहाल शिक्षा व्यवस्था का खुलासा
  1. आदापुर (पूर्वी चंपारण) प्रखंड के अंतर्गत राजकीय मध्य विद्यालय, मझरिया में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यालय में कुल 626 बच्चों का नामांकन है, जबकि निरीक्षण के दौरान लगभग 440 बच्चे उपस्थित मिले। विद्यालय में 6 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन निरीक्षण के समय 5 शिक्षक उपस्थित थे और एक शिक्षक सीएल (CL) पर थे।

विद्यालय का निरीक्षण करने पर बच्चों और अभिभावकों ने कई गंभीर शिकायतें कीं। बच्चों का कहना था कि अधिकांश कक्षाओं में केवल 1 से 2 घंटे ही पढ़ाई होती है, जबकि बाकी समय उन्हें अपनी-अपनी किताब निकालकर स्वयं पढ़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। कई छात्रों ने बताया कि दिनभर में केवल दो विषयों की ही पढ़ाई होती है।

निरीक्षण के दौरान जब पत्रकार विद्यालय पहुंचे तो बताया गया कि अमित कुमार ने बच्चों से कहा कि “शांति से बैठिए और अपनी-अपनी किताब निकालकर पढ़िए।” इस दौरान बच्चे भीषण गर्मी से परेशान थे, क्योंकि कई कमरों में पंखे नहीं हैं या ठीक से काम नहीं करते। विशेष रूप से सीआरसी उर्दू कक्षा में पंखे का अभाव पाया गया, जिससे बच्चे पसीने से पूरी तरह भीगे हुए थे।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है और कई व्यवस्थाओं में सुधार किया है। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि सुधार हुआ है, तो अब तक पंखे क्यों नहीं लगाए गए और नियमित पढ़ाई क्यों सुनिश्चित नहीं हो सकी?

विद्यालय परिसर की स्थिति भी चिंताजनक मिली। परिसर में लगभग 10 से अधिक शराब (कस्तूरी) की खाली बोतलें पड़ी मिलीं। इससे विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। यदि विद्यालय में नाइट गार्ड की व्यवस्था है, तो आखिर परिसर में शराब की बोतलें कैसे पहुंचीं?

मध्याह्न भोजन को लेकर भी बच्चों ने शिकायत की कि उन्हें पुराना चावल परोसा जा रहा है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

विद्यालय में स्मार्ट क्लास बंद है। शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब है। शौचालय से दुर्गंध आ रही थी और 626 बच्चों के लिए पर्याप्त शौचालय की व्यवस्था नहीं है। छात्राओं के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय की भी आवश्यकता महसूस की गई।

विद्यालय परिसर में संचालित हाई स्कूल की व्यवस्था को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। बताया गया कि हाई स्कूल का स्थायी प्रभारी नहीं है, फिर भी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। छात्रों का कहना है कि हाई स्कूल में भी केवल 2 से 3 घंटे ही पढ़ाई होती है और बाकी समय पढ़ाई प्रभावित रहती है।

विद्यालय में 6 रसोइया कार्यरत हैं, जिनमें आमना खातून, श्रीमती देवी, मोफायजा खातून, नगमा खातून शामिल हैं। एक रसोइया सुशीला देवी का निधन हो चुका है, जिनके स्थान पर उनके परिवार के सदस्य को नियुक्त करने की मांग की गई। एक रसोइया मदन महतो निरीक्षण के दिन अनुपस्थित थे।

जब विद्यालय प्रशासन से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के नामांकित बच्चों की संख्या पूछी गई, तो स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 626 बच्चों वाले विद्यालय में शिक्षा, मूलभूत सुविधाएं और सरकारी योजनाओं के लिए आने वाली राशि का उपयोग आखिर कहां हो रहा है? यदि शिक्षक पर्याप्त संख्या में हैं, तो नियमित पढ़ाई क्यों नहीं हो रही? बच्चों को गर्मी, बदहाल शौचालय और अव्यवस्थित माहौल में पढ़ने के लिए आखिर कब तक मजबूर रहना पड़ेगा?

अब जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और शिक्षा विभाग को इस विद्यालय की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।