आदापुर में ट्रेन की चपेट में आने से 60 वर्षीय कैलाश राम की मौत, ग्रामीणों ने मिलकर कराया अंतिम संस्कार

आदापुर के श्यामपुर ढाला के पास ट्रेन की चपेट में आने से 60 वर्षीय कैलाश राम की दर्दनाक मौत हो गई। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देता था। घटना के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर अंतिम संस्कार में सहयोग किया।
आदापुर में ट्रेन की चपेट में आने से 60 वर्षीय कैलाश राम की मौत, ग्रामीणों ने मिलकर कराया अंतिम संस्कार
आदापुर के श्यामपुर ढाला के पास ट्रेन की चपेट में आने से कैलाश राम की मौत के बाद मौके पर जुटे ग्रामीण

आदापुर (पूर्वी चंपारण)। आदापुर थाना क्षेत्र के श्यामपुर ढाला के पास ट्रेन की चपेट में आने से 60 वर्षीय कैलाश राम की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान कैलाश राम, पिता रामाशीष राम, निवासी श्यामपुर बाजार, वार्ड संख्या-12, आदापुर के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, कैलाश राम शनिवार की सुबह बिना किसी को बताए घर से निकल गए थे। बताया जा रहा है कि उनकी मानसिक स्थिति पिछले करीब चार वर्षों से ठीक नहीं थी और उनका इलाज चल रहा था। मानसिक स्थिति ठीक होने के कारण नहीं, बल्कि इसी वजह से परिवार के लोग उन्हें अकेले घर से बाहर नहीं जाने देते थे और उनकी निगरानी रखते थे।

लेकिन शनिवार की सुबह वह बिना किसी को बताए घर से निकल गए। इसके बाद श्यामपुर ढाला के पास वह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा बेहद दर्दनाक था और ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।

AGM FIRST की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि कैलाश राम की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और परिवार के लोग उनकी देखभाल करते थे। घटना के बाद ग्रामीणों ने परिवार की स्थिति को देखते हुए मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

पत्नी भी हो चुकी हैं सेवानिवृत्त

मृतक की पत्नी रामरती देवी आदापुर स्वास्थ्य केंद्र में ममता कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थीं। उनकी उम्र भी करीब 60 वर्ष हो चुकी है और बताया जा रहा है कि वह अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। ऐसे में पति की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों की चुनौती बढ़ गई है।

कैलाश राम के कुल चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और 1 बेटे हैं। दो बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि 1 बेटी और 1 बेटा अभी अविवाहित हैं।

ग्रामीणों ने मिलकर कराया अंतिम संस्कार

कैलाश राम की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए गांव के आसपास के टोला-मोहल्ले के लोग एकजुट हुए। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और मिलकर कैलाश राम का अंतिम संस्कार कराया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पोस्टमार्टम कराने को लेकर ग्रामीणों और परिजनों की सहमति नहीं बनी, जिसके बाद पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। जबतक खबर ले रहे थे तबतक ग्रामीणों के सहयोग से शव का अंतिम संस्कार के तैयारी की जा रही थी

घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, इस दुख की घड़ी में ग्रामीणों द्वारा परिवार के साथ खड़े होकर अंतिम संस्कार में सहयोग करना मानवीय संवेदना की मिसाल पेश करता है।

नोट: पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण मृत्यु से संबंधित कोई चिकित्सकीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। खबर में दी गई जानकारी मौके पर की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग, प्रत्यक्षदर्शियों एवं स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत के आधार पर प्रस्तुत की गई है।