जीतपुर डिग्री कॉलेज में 84 छात्रों का नामांकन, लेकिन अधूरा भवन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

पूर्वी चंपारण के जीतपुर डिग्री कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कॉलेज में अब तक 84 छात्रों का नामांकन हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक भवन अधूरा है, शौचालय की व्यवस्था नहीं है और पर्याप्त शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कॉलेज के बर्सर डॉ. प्रभाकर सिंह ने भवन निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की है। वहीं, प्राचार्य का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।
जीतपुर डिग्री कॉलेज में 84 छात्रों का नामांकन, लेकिन अधूरा भवन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जीतपुर डिग्री कॉलेज में नामांकन जारी है। 84 छात्रों का प्रवेश हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक भवन, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

छौड़ादानो/ पूर्वी चंपारण। सरकार ने क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जीतपुर में डिग्री कॉलेज की स्थापना तो कर दी है, लेकिन कॉलेज अब भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। कॉलेज में हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विषयों में नामांकन जारी है। अब तक 84 छात्रों का नामांकन हो चुका है, जबकि प्रवेश प्रक्रिया अभी भी जारी है।

कॉलेज में नामांकन कराने पहुंचे छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई शुरू होने से पहले ही कई आवश्यक सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सीमित शिक्षकों के साथ नियमित पढ़ाई कैसे संचालित होगी।

छात्रों ने बताया कि कॉलेज में कंप्यूटर लैब, वाई-फाई, पुस्तकालय सहित अन्य बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव है। उनका कहना है कि आज के डिजिटल दौर में इन सुविधाओं के बिना गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल है।

कॉलेज के बर्सर डॉ. प्रभाकर सिंह ने बताया कि कॉलेज का प्रशासनिक भवन अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य लंबे समय से लंबित है और इसे जल्द पूरा कराया जाना चाहिए। भवन अधूरा रहने के कारण कॉलेज के प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

पूर्वी चंपारण के जीतपुर डिग्री कॉलेज का भवन, जहां 84 छात्रों का नामांकन हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक भवन अधूरा है और बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

उन्होंने बताया कि कॉलेज परिसर में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण कॉलेज के कर्मियों को उसी परिसर में संचालित हाई स्कूल के शौचालय का उपयोग करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि एक डिग्री कॉलेज में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव गंभीर चिंता का विषय है और संबंधित विभाग को इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।

नामांकन कराने वाले छात्रों ने बताया कि इतिहास विषय के लिए 3155 रुपये तथा राजनीति विज्ञान विषय के लिए 3175 रुपये नामांकन शुल्क लिया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि शुल्क की रसीद भी उन्हें उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज के नियमित प्राचार्य को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि अब तक कॉलेज में नियमित रूप से प्राचार्य के कार्य करने की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

AGM FIRST ने कॉलेज के प्राचार्य का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला, जिसके कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

स्थानीय लोगों, छात्रों और अभिभावकों ने बिहार सरकार तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि प्रशासनिक भवन का निर्माण शीघ्र पूरा कराया जाए, नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए तथा शौचालय, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिल सके।