राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बनबिरवा में विषयवार शिक्षकों की कमी, टूटी बाउंड्री और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
कोटवा (पूर्वी चंपारण)। प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बनबिरवा में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच शिक्षा व्यवस्था संचालित हो रही है। विद्यालय में कुल 480 नामांकित छात्रों में से निरीक्षण के दिन 317 छात्र उपस्थित मिले। विद्यालय में कुल 6 शिक्षक कार्यरत हैं और सभी उपस्थित थे।
विद्यालय में प्रधानाध्यापक मृत्युंजय कुमार सहित अनंत प्रसाद गुप्ता, रामबाबू राय, उमेश प्रसाद यादव, आसिफ अहमद खान एवं सबीहा नूर अख्तर कार्यरत हैं। शिक्षकों ने बताया कि विषयवार शिक्षकों की भारी कमी है। हिंदी, गणित, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी के अलग-अलग शिक्षक नहीं होने के कारण एक-एक शिक्षक को दो से तीन कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। प्रधानाध्यापक को भी कार्यालय का कार्य संभालने के साथ-साथ पढ़ाई करानी पड़ती है।
विद्यालय में पुस्तकालय नहीं है, जबकि बच्चों ने बताया कि कई कमरों में पंखे नहीं लगे हैं, जिससे गर्मी के दिनों में पढ़ाई करने में परेशानी होती है।
विद्यालय प्रभारी अनंत प्रसाद गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2014 से 2017 तक मोहम्मद नैयर आलम प्रभारी थे। वर्ष 2017 के बाद मृत्युंजय कुमार प्रभारी रहे, लेकिन विभागीय निर्देश के बाद उन्हें विद्यालय का प्रभार सौंपा गया। उन्होंने कहा कि वे विद्यालय के सभी कमरों में टाइल्स लगवाने का प्रयास कर रहे हैं। विद्यालय में खेल सामग्री और संगीत उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन संगीत शिक्षक का पद रिक्त है। वहीं सम्राट क्लास प्रतिदिन संचालित होती है, हालांकि अंग्रेजी शिक्षक की कमी बनी हुई है।
विद्यालय परिसर में लगे समरसेबल बोरिंग के नल में टोटी नहीं है। इस संबंध में पीएचईडी विभाग को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं हुई। विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था है, लेकिन उसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई गई।
विद्यालय की बाउंड्री वॉल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण बच्चे कभी-कभी विद्यालय परिसर से बाहर निकल जाते हैं। ग्रामीणों ने बाउंड्री वॉल की शीघ्र मरम्मत की मांग की। विद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें। प्रधानाध्यापक ने कहा कि यदि पढ़ाई में किसी प्रकार की कमी मिले तो अभिभावक शिकायत करें, उसमें सुधार किया जाएगा।
ग्रामीण बीरेन्द्र साह, भूलन साह और सोहन साह ने बताया कि विद्यालय में पढ़ाई अच्छी होती है, लेकिन कुछ अभिभावक बच्चों की नियमित उपस्थिति पर ध्यान नहीं देते। उनका कहना था कि कई बच्चे एक-दो घंटे बाद विद्यालय से बाहर निकल जाते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
विद्यालय के नाइट गार्ड को लेकर भी ग्रामीणों ने शिकायत की। उनका आरोप है कि नाइट गार्ड रात में विद्यालय में नियमित रूप से ड्यूटी नहीं करते, जबकि उन्हें विद्यालय परिसर में रहकर सुरक्षा करनी चाहिए।
इस दौरान वार्ड संख्या-10 के ग्रामीणों ने बताया कि लगभग दो माह पहले नल-जल योजना का कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक अधूरा है। वार्ड सदस्य मोहन साह ने बताया कि यह कार्य संबंधित विभाग के अधीन है और इसकी शिकायत अधिकारियों को दी गई है। विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष चंदन साह तथा सचिव सुनीता देवी ने कहा कि सप्ताह के अंतिम शनिवार को आयोजित होने वाली अभिभावक बैठक में विद्यालय से जुड़ी सभी समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।
विद्यालय में मासिक अभिभावक बैठक नियमित रूप से आयोजित होती है, जिसमें लगभग 100 अभिभावक शामिल होते हैं। बैठक में बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और विद्यालय की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की जाती है।
रसोई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। जानकारी के अनुसार रसोइया बेदामी देवी (लगभग 60 वर्ष) के स्थान पर उनकी पुत्रवधू भी कार्य करती हैं। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने जांच की मांग की है।
विद्यालय की भूमि को लेकर भी विवाद सामने आया। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि वर्तमान विद्यालय भवन सरकारी भूमि पर बना है। वहीं कुछ ग्रामीणों का दावा है कि शिवमंगल महतो ने वर्ष 1970 के आसपास विद्यालय निर्माण के लिए लगभग 3 कट्ठा 19 धुर भूमि दान की थी, लेकिन उस भूमि पर भवन का निर्माण नहीं हुआ। दूसरी ओर महेंद्र ठाकुर की भूमि के एक हिस्से पर विद्यालय भवन बने होने का भी दावा किया जा रहा है। इस मामले में प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति, पुस्तकालय की स्थापना, बाउंड्री वॉल की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ करने तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
