भारत-सिंगापुर साझेदारी को नई दिशा, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर चर्चा

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, कनेक्टिविटी, कौशल विकास, हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
भारत-सिंगापुर साझेदारी को नई दिशा, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर चर्चा
भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान डॉ. एस. जयशंकर।

भारत सिंगापुर बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। विदेश मंत्री के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में शामिल हुए।

डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक को बेहद उपयोगी और सकारात्मक बताते हुए कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

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बैठक में सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री गन किम योंग समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया। डॉ. जयशंकर ने सिंगापुर के वरिष्ठ नेताओं को सकारात्मक और सार्थक संवाद के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने सिंगापुर के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं गृह मामलों के समन्वय मंत्री के. शनमुगम, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री जोसेफिन टियो और परिवहन मंत्री जेफ्री सिओ के साथ हुई चर्चा को महत्वपूर्ण बताया।

उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर पर जोर

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की बढ़ती मांग के बीच दोनों देशों के लिए इस क्षेत्र में साझेदारी की बड़ी संभावनाएं हैं।

भारत अपनी विनिर्माण क्षमता और तकनीकी आधार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं, सिंगापुर भी तकनीक और वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने से नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

डिजिटल और फिनटेक क्षेत्र में सहयोग

बैठक में डिजिटल तकनीक और फिनटेक यानी वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को भी प्रमुखता दी गई। डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

भारत और सिंगापुर के बीच डिजिटल तकनीक, वित्तीय सेवाओं और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने पर विचार किया गया। इससे दोनों देशों की कंपनियों, स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों के लिए नए अवसर विकसित होने की संभावना है।

कनेक्टिविटी और कौशल विकास पर चर्चा

दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी और कौशल विकास के मुद्दे पर भी चर्चा की। बेहतर कनेक्टिविटी व्यापार और निवेश को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करना भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय है।

कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है। भारत और सिंगापुर के बीच इस क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा पर भी फोकस

बैठक में हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के बीच स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में सहयोग दोनों देशों के लिए अहम है।

भारत और सिंगापुर के बीच स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास और हरित तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार हुआ। भविष्य में इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है।

बिजनेस राउंडटेबल के प्रतिभागियों से भी संवाद

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक ने भारत-सिंगापुर बिजनेस राउंडटेबल के प्रतिभागियों के साथ भी बातचीत की। इसमें दोनों देशों के कारोबारी और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ साझेदारी के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच समकालीन और भविष्य उन्मुख साझेदारी को आकार देना दोनों देशों का साझा प्रयास है। सरकार के साथ उद्योग और कारोबारी क्षेत्र की भागीदारी भी इस साझेदारी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत और सिंगापुर के बीच पहले से ही व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के कई क्षेत्र मौजूद हैं। अब उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, कौशल विकास, हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक को इसी व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत कर सकता है, बल्कि भारत-सिंगापुर की दीर्घकालिक और भविष्य उन्मुख रणनीतिक साझेदारी को भी नई गति दे सकता है।